आपके शरीर को बीमार बनाती, प्लास्टिक की बोतल
आज के समय में हर एक घर में पानी को रखने के लिए प्लास्टिक की बोतल का उपयोग आसान हो गया हैं। सस्ता होने के कारण सभी प्लास्टिक बोतल का प्रयोग आसानी से कर पाते है। विशेषज्ञों के मुताबिक तीसरा विश्व युद्ध ही पानी की वजह से होगी ।
प्लास्टिक की दुनिया
केन्द्रीय प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के अनुसार, भारत में हर दिन 25,940 टन प्लास्टिक कचरा के रूप में उत्पन्न होता हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, बढ़ते प्लास्टिक के उपयोग से आने वाले समय में दुनिया भर में 12 अरब टन प्लास्टिक का कचरा जमा हो जाएगा। और इसे नष्ट करना मुश्किल है, अगर प्लास्टिक को जलाया गया तो प्लास्टिक से जलने से खतरनाक गैस निकलता है जाे सेहत के बहुत हानिकारक होता हैं।
प्लास्टिक के बाेतल में पानी के खराब होने के कारण
लाइव साइंस की रिर्पाट के अनुसार पानी कभी खराब नही होता हैं। लेकिन पानी को स्ट्रोर करने के लिए उपयोग किये जाने वाला प्लास्टिक की बाेतल एक समय के बाद अपने प्लास्टिक की परत को पानी में घोलने लगता है।
जिसे पानी का स्वाद बिगड़ता जाता है और पानी से बदबू आने लगती है ।
नेशनल इंस्टीट्यूट आफ एंनवायमेंटल हेल्थ साइंसेज के अनुसार, कई प्लास्टिक की बोतलों को बनाने में BPN नाम के रसायन का उपयोग किया जाता है
जिसका बुरा असर हमारे शरीर पर पड़ता हैं ।
मेयो क्लीनिक के मुताबिक, BPA- ब्लड प्रेशर, टाइप-2 डाइबिटीज और ह्रदय रोगों का खतरा
बढ़ देता हैं।
प्लास्टिक बोतल की एक्सपायरी डेट
सामान्य तौर पर बोतलों की मैन्यूफैक्चरिंग डेट से 2 साल तक की एक्सपायरी डेट दी जाती हैं । 2 साल के भीतर इस्तेमाल अच्छा माना जाता है ।
(single use plastic) पानी कोे खराब होने में कम से कम 6 महिने का समय लगता है। खराब होने की स्थिति तब आती है जब पानी उच्च तापमान या धूप में होता है। उच्च तापमान में पानी कार्बोहाइडेट होने लगता हैं। गैस निकलती है या स्वाद बदलने लगता हैं। धूप के सम्पर्क में आने के बाद बोतल के पानी में पालीथीन टेरिफ़थेलैट मिल जाता है।
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